फर्जी स्टूडेंट काउंसलर ने परीक्षा में नकल का डर दिखाकर मुंबई के MBA छात्र से ठगे 24.64 लाख रुपये

 

मुंबई की बांगुर नगर पुलिस ने 21 वर्षीय MBA छात्र से 24.64 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी ने खुद को कॉलेज का स्टूडेंट काउंसलर बताकर छात्र को डराया कि उसे परीक्षा में नकल के आरोप में संस्थान से निष्कासित कर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। इसके बाद मामला निपटाने के नाम पर उससे पैसे वसूलने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता तीर्थ लिमानी (21) मालाड पश्चिम में रहता है। उसने जनवरी 2026 में विलेपार्ले पश्चिम स्थित एक संस्थान से ऑनलाइन MBA (फाइनेंस) में दाखिला लिया था और फीस के तौर पर 1.12 लाख रुपये जमा किए थे।

कोर्स के बारे में जानकारी लेते समय तीर्थ लिमानी की मुलाकात आलोक केशरी से हुई। आलोक केशरी ने खुद को संस्थान का आधिकारिक कर्मचारी और स्टूडेंट काउंसलर बताया। उसे दाखिला प्रक्रिया की जानकारी थी, इसलिए तीर्थ लिमानी ने उस पर भरोसा कर लिया। तीर्थ लिमानी ने अपने दस्तावेज भी उसे दिए और आरोप है कि आलोक केशरी ने दाखिले की प्रक्रिया पूरी कराने में उसकी मदद की।

परीक्षाएं नजदीक आने पर आलोक केशरी ने तीर्थ लिमानी को फोन कर कहा कि उसे उसका आधिकारिक स्टूडेंट काउंसलर नियुक्त किया गया है और परीक्षा से जुड़ी किसी भी समस्या में वह उससे संपर्क कर सकता है।

जून 2026 में आलोक केशरी ने तीर्थ लिमानी को बैंक खाते की जानकारी देकर ऑनलाइन परीक्षा के लिए 1,560 रुपये जमा करने को कहा।

14 जून को ऑनलाइन परीक्षा देते समय तीर्थ लिमानी को एक अलर्ट मिला कि परीक्षा के दौरान नकल करते हुए पकड़ा गया है। तीर्थ लिमानी का दावा था कि उसने कोई नकल नहीं की थी। उसने आलोक केशरी से संपर्क कर इस बारे में बताया। इसके बाद 21 जून को अंतिम परीक्षा के दौरान उसे फिर इसी तरह का अलर्ट मिला और परीक्षा का एप्लिकेशन बंद हो गया।

इसके बाद आलोक केशरी ने तीर्थ लिमानी को फोन कर पूछा कि क्या उसने परीक्षा में नकल की थी। तीर्थ लिमानी के इन्कार करने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसे धमकाना शुरू कर दिया। उसने कहा कि नकल के कारण उसे संस्थान से निष्कासित कर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। साथ ही कथित तौर पर यह भी कहा कि उसे किसी दूसरे संस्थान में दाखिला नहीं मिलेगा और उसका पूरा शैक्षणिक करियर बर्बाद हो जाएगा।

आरोप है कि इसके बाद आलोक केशरी ने मामला सुलझाने की पेशकश की और इसके बदले पैसे मांगने शुरू कर दिए। उसकी बातों पर विश्वास करते हुए तीर्थ लिमानी ने जब भी पैसे मांगे, ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।

पुलिस के मुताबिक, तीर्थ लिमानी के पिता डेवलपर हैं और वे अक्सर अपने बेटे से आर्थिक लेन-देन करवाते थे। इसलिए तीर्थ लिमानी के बैंक खाते में पैसे उपलब्ध थे। उसने पिता को बताए बिना कथित तौर पर ये रकम आरोपी के खातों में ट्रांसफर कर दी।

तीर्थ लिमानी का विश्वास बनाए रखने के लिए आलोक केशरी ने भरोसा दिलाया कि यदि मामला नहीं सुलझा तो उसके पैसे वापस कर दिए जाएंगे। इसके बाद तीर्थ लिमानी ने 71 अलग-अलग लेन-देन में कुल 24.64 लाख रुपये आलोक केशरी द्वारा दिए गए दो बैंक खातों में ट्रांसफर किए।

इसी बीच तीर्थ लिमानी का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ और वह परीक्षा में पास हो गया। लेकिन आलोक केशरी को उसके परिणाम की जानकारी नहीं थी और वह कथित तौर पर उसका नाम ब्लैकलिस्ट होने से बचाने के नाम पर लगातार पैसे मांगता रहा।

इसके बाद तीर्थ लिमानी को एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है और उसने बांगुर नगर पुलिस से संपर्क किया।

पुलिस ने 5 सितंबर 2026 को आलोक केशरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा BNS और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।

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